दुर्गा अष्टमी व राम नवमी में कन्या पूजन
भारतीय हिन्दू संस्कृति में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। इस शुभ कार्य को घरों में किसी पर्व की तरह मनाया जाता है। दुर्गा अष्टमी में हर घर में कन्याओं का पूजन होता है। नवरात्रों में माता के 9 रूपों की पूजा की जाती है। हर दिन माता की आराधना की जाती है और माता मनचाहा वर देती है।
नवरात्रों का महत्व:-
हमारी चेतना के अंदर सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण है। प्रकृति के साथ इसी चेतना के उत्सव को नवरात्रि कहते है। इन 9 दिनों में पहले तीन दिन तमोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं, दूसरे तीन दिन रजोगुणी और आखरी तीन दिन सतोगुणी प्रकृति की आराधना का महत्व है ।
दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती ये तीन रूप में माँ की आराधना करते है| माँ सिर्फ आसमान में कहीं स्थित नही हैं, उसे कहते हे की
"या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते" - "सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ / देवी तुम स्थित हो"
माँ के 9 रूप:-
नवरात्रि माँ के अलग अलग रूप को निहारने का सुन्दर त्यौहार है। जैसे कोई शिशु अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने रहता हे, वैसे ही हम अपने आप में परा प्रकृति में रहकर - ध्यान में मग्न होने का इन 9 दिन का महत्व है। वहाँ से फिर बाहर निकलते है तो सृजनात्मकता का प्रस्सपुरण जीवन में आने लगता है।
शैलपुत्री
ब्रह्मचारिणी
चन्द्रघंटा
कूष्माण्डा
स्कंदमाता
कात्यायनी
कालरात्रि
महागौरी
सिद्धिदात्री
कन्या पूजन:-
हमारी भारतीय संस्कृति में कन्या को देवी के रूप में पूजा जाता है। पुरुष प्रधान समाज होने का लांछन लिए हमारा समाज स्त्री को माँ , देवी के रूप में पूजता आया है। किसी भी शुभ कार्य में कन्या पूजन करना हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। नवरात्रों से लेकर जन्मदिन पूजन तक कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है।
हरियाली बोना:- इन 9 दिनों में घरों तथा मंदिरों में हरियोली बोई जाती है। जौ को किसी वर्तन में मिटटी के बीच उगाया जाता है। 9 दिन के बाद कन्याओं के पांव धुलाये जाते हैं तथा उन्हें प्रसाद देकर सुखद जीवन का आशीर्वाद लेते हैं।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र
9736296410
भारतीय हिन्दू संस्कृति में कन्या पूजन का बहुत महत्व है। इस शुभ कार्य को घरों में किसी पर्व की तरह मनाया जाता है। दुर्गा अष्टमी में हर घर में कन्याओं का पूजन होता है। नवरात्रों में माता के 9 रूपों की पूजा की जाती है। हर दिन माता की आराधना की जाती है और माता मनचाहा वर देती है।
नवरात्रों का महत्व:-
हमारी चेतना के अंदर सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण है। प्रकृति के साथ इसी चेतना के उत्सव को नवरात्रि कहते है। इन 9 दिनों में पहले तीन दिन तमोगुणी प्रकृति की आराधना करते हैं, दूसरे तीन दिन रजोगुणी और आखरी तीन दिन सतोगुणी प्रकृति की आराधना का महत्व है ।
दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती ये तीन रूप में माँ की आराधना करते है| माँ सिर्फ आसमान में कहीं स्थित नही हैं, उसे कहते हे की
"या देवी सर्वभुतेषु चेतनेत्यभिधीयते" - "सभी जीव जंतुओं में चेतना के रूप में ही माँ / देवी तुम स्थित हो"
माँ के 9 रूप:-
नवरात्रि माँ के अलग अलग रूप को निहारने का सुन्दर त्यौहार है। जैसे कोई शिशु अपनी माँ के गर्भ में 9 महीने रहता हे, वैसे ही हम अपने आप में परा प्रकृति में रहकर - ध्यान में मग्न होने का इन 9 दिन का महत्व है। वहाँ से फिर बाहर निकलते है तो सृजनात्मकता का प्रस्सपुरण जीवन में आने लगता है।
शैलपुत्री
ब्रह्मचारिणी
चन्द्रघंटा
कूष्माण्डा
स्कंदमाता
कात्यायनी
कालरात्रि
महागौरी
सिद्धिदात्री
कन्या पूजन:-
हमारी भारतीय संस्कृति में कन्या को देवी के रूप में पूजा जाता है। पुरुष प्रधान समाज होने का लांछन लिए हमारा समाज स्त्री को माँ , देवी के रूप में पूजता आया है। किसी भी शुभ कार्य में कन्या पूजन करना हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा है। नवरात्रों से लेकर जन्मदिन पूजन तक कन्या पूजन के बिना अधूरा माना जाता है।
हरियाली बोना:- इन 9 दिनों में घरों तथा मंदिरों में हरियोली बोई जाती है। जौ को किसी वर्तन में मिटटी के बीच उगाया जाता है। 9 दिन के बाद कन्याओं के पांव धुलाये जाते हैं तथा उन्हें प्रसाद देकर सुखद जीवन का आशीर्वाद लेते हैं।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र
9736296410


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