Tuesday, March 28, 2017

अपंगता को हरा चुवाड़ी का संजय बना ओलम्पिक विजेता

संजय को मिले उसका हक़ आओ आवाज उठायें।
                

संजय और कंचन ऑस्ट्रिया से लौटने के बाद
कहते हैं कि सपने उसी के पुरे होते हैं जिसके सपनो में जान होती है,
पँखो से कुछ नहीं होता दोस्तो हौंसलो से उड़ान होती है

कुछ ऐसी ही उड़ान भरी है चुवाड़ी के संजय कुमार ने स्पेशल विंटर ओलिंपिक में स्नो बोर्डिंग प्रतियोगिता में 2 गोल्ड मैडल जीत कर। ऑस्ट्रिया के ग्रास शहर में 14 मार्च से 25 मार्च तक चले स्पेशल ओलिंपिक में विश्व के बहुत से देशों ने हिस्सा लिया संजय कुमार ने जबरदस्त खेल दिखाते हुए 2 गोल्ड मैडल अपने नाम किये। जब कोई महान कार्य करता है तो उसके बचपन को याद किया जाता है और लिखा जाता है कि बचपन से कुशाग्र बुद्धि के धनी पर यंहा संजय के लिए बिलकुल उल्टा है संजय बचपन से ही मन्दबुद्धि था और यही श्राप उसने अपने लिए बरदान बना लिया। एक ही कक्षा में कई बार फेल होने वाला संजय सिर्फ पांच कक्षा ही पढ़ पाया। और हमेशा उपहास का केंद्र रहा। ज़िन्दगी से लड़ते लड़ते और लोगो की गालियां सुनता संजय चुवाड़ी की गलियों में बड़ा होता गया। घर की आर्थिक हालत ठीक न होने की वजह से मजदूरी करता रहा। अंत्योदय परिवार से सम्बंधित संजय ने पूरी दुनिया में मिसाल कायम की है कि अगर इंसान के अंदर कुछ करने का जज्बा हो तो बाधाएं रोक नहीं पाती।
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मानसिक अपंगता का शिकार:-

संजय कुमार बचपन से ही मानसिक अपंगता का शिकार है इसीलिए इसका मानसिक विकास नहीं हो पाया और स्वभाव में बिलकुल भोला भाला संजय जुबान से भी लड़खड़ाता है। परन्तु इतनी मुश्किल के बाद भी संजय ने हार नहीं मानी और दो बार भारत का अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर सफल नेतृत्व कर चुका है।

2013 में दो गोल्ड मैडल:-

2013 में साउथ कोरिया में स्पेशल विंटर ओलिंपिक में भी संजय अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चूका है। 2013 में संजय कुमार ने स्नो बोर्डिंग प्रतियोगिता में दो गोल्ड मैडल जीत चूका है।

मुस्लिम परिवार से सम्बंधित :-

संजय कुमार धर्म की बेड़ियों में बंधा नहीं है इसलिये मुस्लिम जुलाहा परिवार से सम्बंधित होने के बाबजूद भी नाम हिन्दू ही है। पिता का नाम लिखो और माता का देहांत हो चूका है। संजय कुमार को वैसे तो बोलने में समस्या है परंतु भजन गाने में संजय का कोई मुकाबला नहीं और भजन और माता के जगराते गाते समय संजय की जुबान जरा भी नहीं लड़खड़ाती।
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दोस्तों में मशहूर है "चमकीला":-

संजय को उसके दोस्त चमकीला के नाम से जानते है मैं भी संजय के साथ पढ़ा हूँ जब हम संजय के साथ पढ़ते थे तो संजय बहुत अच्छे गाने सुनाता था इसीलिए इसका नाम चमकीला पड़ गया। आज हम संजय के दोस्त आज गर्व से कहते हैं कि हम संजय के साथ पढ़े है और आज चमकीले की चमक पुरे विश्व में है।
पैराडाइज़ स्कूल ने तराशा हीरा:-
                  पैराडाइज़ के गुरुओं संग संजय
कहते हैं कि बिना गुरु ज्ञान नहीं और किसी व्यक्ति में क्या प्रतिभा है ये विद्यालय में ही निखर कर सामने आती है। पैराडाइज़ चिल्ड्रन केअर सेंटर चुवाड़ी को इसका पूरा श्रेय जाता है जिस तरह उन्होंने संजय जैसे सैंकड़ो दिव्यांग जनों को जीने की राह दिखाई।समाज से कट चुके लोगों को पैराडाइज़ चिल्ड्रन सेंटर में पढ़ाया लिखाया जाता है। 2007 से चुवाड़ी में चल रहा है ये सेंटर और 2008 में जब संजय यंहा वँहा मजदूरी करता था तब इस सेंटर के एम् डी श्री अजय जी के सम्पर्क में आया संजय और फिर शुरू हुआ संजय के सर्वांगीण विकास का सफर।
अन्य बच्चो ने भी ऊँचा किया है नाम:-

संजय की तरह कुछ और बच्चो को भी ये सेंटर विश्व स्तर पर परिचित करवाने में लगा है। सुलोचना देवी मानसिक रूप से अक्षम ये बेटी लॉस एंजेलिस में 2015 में पावर लिफ्टिंग में गोल्ड मैडल जीत चुकी है। इस बार संजय के साथ एक बेटी और गयी थी पैराडाइज़ चिल्ड्रन सेंटर से कंचन देवी अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी दुर्भाग्यबश इस बार जीत न पायी।
पैराडाइज़ स्कूल में ही चपड़ासी का काम:-

संजय कुमार इस समय पैराडाइज़ स्कूल में जी चपड़ासी का काम कर के अपनी आजीविका कमा रहा है।इसी संस्थान ने संजय को अपने ही स्कूल में नोकरी दी है ताकि संजय को यंहा वँहा भटकना न पड़े।
क्या कहते है संस्थान के एमडी:-

संसथान के एमडी अजय चंबियाल जी का कहना है कि ऐसे दिव्यांग बच्चो को भी वैसा ही सम्मान और हक़ मिलना चाहिए जो आम खिलाडी को मिलता है ये बच्चे विकट परिस्थिति में खेल कर देश का नाम चमका रहे हैं। हमे ऐसे बच्चों पर गर्व है।

आरएफसी क्लब सम्मानित कर चुका है:-
आरएफसी क्लब शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने वाला क्लब आरएफसी चुवाड़ी संजय को 2013 के गोल्ड मैडल जितने पर तथा इसी संसथान की सुलोचना को गोल्ड मैडल जितने पर सम्मानित कर चुका है। क्लब के सचिव कनव शर्मा ने सरकार से मांग की है कि ऐसे बच्चो का भविष्य सुरक्षित रहे इसके लिए इन्हें नोकरी दी जाये ताकि ये समाज में सम्मान जनक तरीके से जी सकें।
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संजय कुमार निकट भविष्य में भी इसी तरह के कारनामे करता रहे यही कामना पूरा भारत वर्ष करता है। संजय ने ये साबित कर दिया कि यदि मेहनत की जाये और संघर्षो से न घबराए तो कोई राह मुश्किल नहीं।
 कौन कहता है आसमान पर छेद नहीं होता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।
लेखक परिचय
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा
अध्यापक और लेखन
9736296410
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Friday, March 10, 2017

हिमाचल बजट की कुछ मुख्य घोषणाएं और खास बातें।

आखिरी बजट में CM का बड़ा ऐलान: 1000 रुपए मिलेगा बेरोजगारी भत्ता

: मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपना 20वां और इस सरकार का आखिरी बजट पेश कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि क्या है बजट 2017-18 की खास बातें।
 

जानिए, बजट 2017-18 की खास बातें
- बेरोजगार युवकों को मिलेगा बेरोजगारी भत्ता
- दसवीं और 12वीं पास को मिलेगा 1 हजार प्रति माह
- दिव्यांगों को मिलेगा 1500 रुपए प्रति माह 
- 650 स्कूलों में वोकेशनल लोबेरेटरी होगी अपग्रेड
- 12 कॉलेजों में शुरू होंगे बी-वोकेशनल कोर्स
- इसके लिए बजट में 39 करोड़ रुपए का प्रावधान
- 850 स्कूलों में मिल रही वोकेशनल शिक्षा
- 57 हजार विद्यार्थी ग्रहण कर रहे वोकेशन शिक्षा
- बेटी है अनमोल योजना का बजट बढ़ा, 5001 से बढ़ाकर राशि 10,000 करने का प्रस्ताव
- मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का बजट बढ़ा, राशि 25000 से बढ़ाकर 40,000 करने का प्रस्ताव
- बजट के दौरान मुख्यमंत्री ने शेयर भी पढ़ा, डर मुझे भी लगा फासला देखकर, मगर मैं बढ़ता गया रास्ता देखकर, खुद ब खुद मंजिल पास आती रही मेरा हौसला    देखकर
- बीमार लोगों के लिए मुफ्त बस सेवा 
- 154 करोड़ से राजीव गांधी सिंचाई योजना शुरू की
- 1134 करोड़ हिमाचल हॉर्टिकल प्रोजेक्ट के लिए नाबार्ड ने दिए
- पिछले 4 सालों में बनाए गए 40 हजार घर 
- 13716 हेक्टेयर क्षेत्र में सिचाई सुविधाएं दी गई
- कर्माचारियों को 2455 करोड़ रुपए के अतिरिक्त लाभ दिए गए
- पेंशनर्स को 910 करोड़ के लाभ पिछले 4 सालों में दिए गए
- धर्मशाला को लाया गया स्मार्ट सिटी के तहत 
- शिमला और कुल्लू को अमृत योजना के तहत लाया गया
- मुख्यमंत्री ने शायराना अंदाज में कहा- मेरा यही अंदाज जमाने को खलता है इतनी मुश्किल सहकर भी यह सीधा कैसे चलता है
- एंटी हेल नेट पर सब्सिडी 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत की गई
- सभी विभागों में सर्वे किया जाएगा कि कितने लोग फील्ड पर जाते हैं और कितने सचिवालय कार्यालय में आते हैं 
- सभी विभागों को पूछा जाएगा कि लोगों को घर पर सुविधाएं देने के लिए क्या किया जाए 
- प्रशासन जनता के द्वार की तर्ज पर काम करने को तैयार
- नोटबंदी के बाद राष्ट्रीय विकास पिछले सालों की तुलना में खराब हुआ 
- केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक विकास दर 7.9 के मुकाबले 7.1 पहुंची
- 1946 में भी विमुद्रीकरण की नीति अपनाई गई थी, जिसे बाद में रद्द करना पड़ा  
- बिना तैयारी के ही 2016 में विमुद्रीकरण किया गया
- लोगों को मुश्किले हुईं जो आज भी जारी है
- सभी क्षेत्रों पर इसका बुरा असर पड़ा, व्यापार, उत्पादन में गिरावट आई 
- किसानों की आय में भी कमी आई  
- देश को इससे उबरने में कई साल लगेंगे
- हिमाचल देश के लिए विकास का एक मॉडल है
- 7.4 फीसदी की दर से पिछले 4 सालों में विकास हुआ
- प्रति व्यक्ति आय को 147277 करने का लक्ष्य
- मुख्यमंत्री ने कुल 5700 करोड़ पेश किया बजट 
- 1000 करोड़ अनुसूचित जाति, 538 और 70 करोड़ पिछड़ा क्षेत्र के लिए हमारा कर्ज चिंता का विषय रहा है
- हमारा कर्ज मार्च 2016 तक 38,568 करोड़
- 2017-18 में हमारा ब्याज 3500 करोड़ होगा
- मुख्यमंत्री ने एक और पढ़ा शेयर, अपनी उलझनों में ही अपनी मुश्किलों के हल मिलते हैं, जैसे टेड़ी-मेढ़ी शाखाओं पर ही रसीले फल मिलते हैं
- विधायक निधि की राशि को 1 करोड़ से बढ़ाकर किया 1 करोड़ 10 लाख रुपए 
- हमने ई-गवर्नमेंट शुरू कर टेंडर प्रक्रिया को किया ऑनलाइन 
- 100 फीसदी आधार एनरोलमेंट से लोगों को हुआ फायदा 
- शिमला में टेक्नोलॉजी पार्क बनेगा जिससे 400 युवाओं को रोजगार मिलेगा
- तिब्बतियों को भी सस्ता राशन मिलेगा, इसके लिए 220 करोड़ रुपए सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के लिए
- पीडीएस के तहत डिजिटल राशन कार्ड जारी होंगे
- वर्ल्ड बैंक ने हॉर्टिकल्चर प्रोजेक्ट के लिए 1144 करोड़ रुपए दिए
- इसके तहत ऑटोमेटिक पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग प्लांट पर ज्यातादर राशि खर्च होगी
- रोहडू और कुल्लू में इसके लिए बाजार स्थापित किया जाएगा
-  वेदर रिकॉर्डिंग सिस्टम प्रदेशभर में शुरू किए जाएंगे, जिससे किसानों को फसल बीमा का मिलेगा सही लाभ  
- वेदर बेस्ड क्रॉप इंश्योरेंस की शुरूआत की घोषणा
- मुख्यमंत्री कीवी प्रोत्साहन योजना की घोषणा
- कीवी फ्रूट्स के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
- योजना के तहत 50 फीसदी सब्सिडी कीवी फलों की खरीद-बिक्री में दी जाएगी
- कीवी प्रोत्साहन योजना के लिए 4 करोड़ रुपए का बजट 
- किसानों को प्लास्टिक ट्रे पर मिलेगी 50 फीसदी सब्सिडी
- नर्सरी उत्पादन और इंडोर प्लांट के लिए नई योजना
- ई-मार्केटिंग की शुरुआत जिला स्तर पर होगी, जिससे हॉर्टिकल्चर फसल को हेलस्टॉर्म से बचाया जा सके
- सॉयल हेल्थ मैनेजमेंट, प्रूनिंग, पॉलीहाउस के लिए शॉर्ट टर्म कोर्सेस होंगे शुरू 
- 3 करोड़ रुपए के बजट से ग्रामीण युवाओं को दिया जाएगा इसका प्रशिक्षण 
- हॉर्टिकल्चर विभाग के लिए 424 करोड़ रुपए 
- 25 लाख रुपए तक की सॉयल टेस्टिंग लैब को 40 फीसदी सब्सिडी 
- मुख्यमंत्री खेत संरक्षण योजना की शुरुआत की गई, इस योजना के तहत सोलर फेंसिंग पर सब्सिडी को 60 फीसदी से 80 फीसदी करने का प्रावधान
- सीएम वीरभद्र सिंह का शायराना अंदाज, हवा से कह दो कि खुद को आजमा के दिखाए, बहुत चिराग बुझाती है एक जलाकर तो दिखाए
- किसान स्वरोजगार योजना पॉलीहाउस लगाने के लिए शुरू की
- 5 साल बाद पॉलीहाउस को बदलने पर 50 फीसदी की सब्सिडी मिलेगी
- न्यू मुख्यमंत्री ग्रीन हाउस रेनोवेशन स्कीम
- किसानों को सब्सिडी सीधे उनके खातों में मिलेगी
- ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए बायो पेस्टिसाइज
- 200 बायो विलेज्स साल 2017-18 में बनाए जाएंगे जिसमें ऑर्गेनिक खेती होगी
- बेस्ट ऑर्गेनिक फार्म को 5 लाख, 3 लाख और 1 लाख का इनाम दिया जाएगा
- ये पुरस्कार न्यू जैविक खेती पुरस्कार योजना के तहत दिए जाएंगे
- जैविक खेती के अधीन 2000 हैक्यटेयर क्षेत्र लाने का रखा लक्ष्य, 20 हजार बर्मी कंपोस्ट यूनिट लगाने का रखा लक्ष्य
- पशु पालकों के लिए शुरु होगी हेल्पलाइन
- पशुओं की बीमारी पर मिलेगी सहायता
- मुख्यमंत्री खेत सरंक्षण योजना की अनुदान राशि 60 फीसदी से बढ़ाकर 80 फीसदी बढ़ी
- विदेशी और ऑफ सीजन सब्जियों की पैदावार को देंगे बढ़ावा 
- 1165 करोड़ का बागवानी विकास प्रोजेक्ट किया लांच
- मिल्क प्रोसेसिंग और चिलिंग के लिए मिलेगी 75 फीसदी सब्सिडी
- विदेशी और ऑफ सीजन सब्जियों की पैदावार को देंगे बढ़ावा 
- मिल्कफैड को दूध बेचने वाले पशुपालकों को तोहफा
- अगले वित्त वर्ष से दूध की कीमत में बढ़ौतरी का किया ऐलान, प्रति लीटर एक रुपए कीमत बढे़गी
- इस साल बनाए जाएंगे 100 ट्राऊट यूनिट, अभी तक 6011 ट्राउट मच्छली यूनिट प्रदेश में, नए यूनिट बनाने के लिए सरकार देगी सहायता
- प्रदेश में मच्छली पालन को मिलेगा और बढ़ावा, 12 हजार से अधिक मच्छुआरे मछली पालन से जुड़े हैं, राज्य में 1 हजार ट्राउट यूनिट स्थापित होंगे
- आवारा पशुओं की पहचान के लिए टैटूज का इस्तेमाल होगा
- पशुपालन विभाग के लिए 374 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान
- राज्य में 13 हजार वर्ग किलो मीटर बढ़ा फारेस्ट कवर
- फेंसड वानर वाटिका शिमला के तारादेवी में स्थापित की जाएगी, जिसमें आवारा बंदरों को रखने की व्यवस्था होगी
- पौंग डैम में पर्मानेंट बर्ड मॉनिटरिंग सिस्टम शुरू होगा
- हिमाचल प्रदेश एन्वायरमेंट लीडरशिप अवॉर्ड शुरू किए जाएंगे
- पर्यावरण संरक्षण के लिए ये पुरस्कार दिए जाएंगे
- इसमें 1 लाख रुपए का पुरस्कार, 50 हजार रुपए का पुरस्कार और 25 हजार रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे
- 500 इको विलेज शुरू किए जाएंगे
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शिमला में खोलेगा क्षेत्रीय कार्यशाला
- जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए मिलेगी सुविधा
- जिला परिषद और पंचायत समितियों के लिए धन का किया प्रावधान
- प्रदेश सरकार ने 2017-18 के लिए 42 करोड़ रुपए का किया प्रावधान
- राज्य में 13 वर्ग किलोमीटर बढ़ा फारेस्ट कवरट
- नई मुख्यमंत्री जीवनयापन योजना होगी शुरु
- योजना को लिए 10 करोड़ का प्रावधान
- लोन के ब्याज पर मिलेगी छूट
- प्रदेश में 4 लाख स्वाइल हेल्थ कार्ड बनाए गए
- हमीरपुर जिला देश में रहा अव्वल
- स्वाइल हेल्थ लैब को और उपयोगी बनाया जाएगा
- सोशल ऑडिट योजना की घोषणा, सभी विभागों को हर माह देनी होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
- सरकार गुणवत्ता युक्त साफ पानी देने के लिए प्रतिबद्ध है
- 512 फिल्ट्रेशन यूनिट स्थापित किए जाएंगे
- 31 मार्च 2017 तक स्थापना सुनिश्चित होगी
- प्रदेश में टूरिज्म पार्क बनाने की घोषणा। कनलोग, सराहन, कुल्लू, कसोल, धर्मशाला, पांवटा में बनेंगे पार्क
- प्राकृतिक धरोहरों को संजोए रखने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शिमला में खोलेगा कार्यशाला
- पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लिए एनवायरमेंट लीडरशीप अवार्ड की घोषणा, विजेता को एक लाख रुपए और ट्रॉफी देने का ऐलान
- बीपीएल परिवारों के लिए बोर्ड लगाने के लिए दो महीने का वक्त, बोर्ड न लगाने पर हटेगा सूची से नाम
- उद्योगों के विकास के लिए उद्योगों को एंट्री टैक्स, विद्युत ड्यूटी, चेंज इन लैंड यूज चाजेर्ट, स्टेंप ड्यूटी में छूट दी जा रही है
- हैंडलूम क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए योजना की शुरूआत, 193 करोड़ योजना के लिए रखे गए 
- शहरी इलाकों में पार्किंग के लिए 50 फीसदी ग्रांट देगी सरकार
- अटल मिशन और अमृत मिशन योजना के तहत राज्य सरकार ने राशि बढ़ाकर 50 करोड़ की
- अर्बन लोकल बॉडीज को सरकार ग्रांट देगी, बजट में 10 करोड़ रुपए का प्रावधान
- वीरभद्र का शायराना अंदाज-ऐ मेरे परिंदे यूं जमीन पर बैठकर क्यों आसमान को देखता है,पंखों को खोल क्योंकि जमाना सिर्फउड़ान देखता है।
शिमला। इस सरकार का यह आखिरी बजट वाटर गार्डों, पंचायत चौकीदारों, आशा वर्कर, आंगनबाड़ी वर्कर व एसएमसी अध्यापकों कंप्यूटर टीचर तथा आउटसोर्स कर्मचारियों आदि के लिए कुछ राहत लेकर आया है। प्रदेश सरकार ने इनके मानदेय व सहायता अनुदान में बढ़ोतरी की सौगात दी है। वहीं,  कंप्यूटर टीचर तथा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए एक माह में समुचित नीति बनाई जाएगी। बजट भाषण में सीएम वीरभद्र सिंह ने घोषणा करते हुए कहा कि अब वाटर गार्डों का मानदेय 1500 से बढ़ाकर 1700 प्रति माह किया जाएगा।
वाटर गार्डों को 1500 की बजाए 1700 प्रति माह मिलेगा मानदेय
पंचायत चौकीदारों का सहायता अनुदान 2050 से बढ़ाकर 2550 प्रति माह
सिलाई अध्यापिकाओं का मानदेय 2300 से 2800 प्रतिमाह बढ़ाया जाएगा
मिड डे मील के तहत कार्यरत रसोईया एवं सहायक को राज्य कोष से मिलेंगे 200 प्रतिमाह
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को1000, सहायकों के अतिरिक्त मानदेय को 300 से बढ़ाकर 600 किया
पंचायत चौकीदारों का सहायता अनुदान 2050 से बढ़ाकर 2550 प्रति माह किया जाएगा तथा ग्राम पंचायत की सिलाई अध्यापिकाओं का मानदेय 2300 से 2800 प्रतिमाह बढ़ाया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं को उनके कार्यकलापों के आधार पर प्रोत्साहन राशि दी जाती है। अब उन्हें कम से कम 800 की प्रोत्साहन राशि प्रतिमाह दी जाएगी। एसएमसी अध्यापकों का पारिश्रमिक 30 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा।
रसोईया एवं सहायक जो मिड डे मील स्कीम में कार्यरत हैं, को भारत सरकार द्वारा 1000 प्रति माह की दर से भुगतान किया जा रहा है। अब 200 प्रतिमाह की अतिरिक्त राशि राज्य कोष से मिलेगी। इससे 22,500 व्यक्तियों को लाभ मिलेगा। बजट भाषण के दौरान सीएम ने कहा कि
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायकों को भारत सरकार द्वारा आईसीडीएस योजना के अंतर्गत तय किए हुए मानदेय के अतिरिक्त भी प्रदेश सरकार द्वारा मानदेय दिया जा रहा है। वर्ष 2014-15 में राज्य सरकार द्वारा इस अतिरिक्त मानदेय को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए 300 से बढ़ाकर 450 प्रति माह तक बढ़ाया गया था तथा सहायकों के लिए 200 से बढ़ाकर 300 प्रति माह बढ़ाया गया था। अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त मानेदय को 450 से बढ़ाकर 1000 तथा सहायकों के अतिरिक्त मानदेय को 300 से बढ़ाकर 600 किया जाएगा, जिससे 36,800 कर्मियों को लाभ मिलेगा। सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की समुचित आवासीय आवश्कताओं से अवगत है। वर्तमान मकानों को भी रख-रखाव की आवश्यकता है। 45 करोड़ की राशि के सरकारी कर्मचारियों के नए आवास निर्माण हेतु प्रस्तावित की गई है। सरकारी आवासों की मरम्मत के लिए 20 करोड़ की राशि चिन्हित करना प्रस्तावित है। तहसीलों/उप-तहसीलों तथा राजस्व भवनों के निर्माण हेतु 10 करोड़ का बजट परिव्यय प्रस्तावित किया गया है।
गरीबों को आवास बनाने को मिलेंगे 1 लाख 30 हजार
शिमला। प्रदेश में स्वतंत्रता सेनानियों, स्वतंत्रता सेनानियों की विधावाओं को मिलने वाली सम्मान राशि में इजाफा कर दिया गया है। इसके लिए स्वतंत्रता सेनानियों की पुत्रियों के विवाह के समय दी जाने वाली विवाह अनुदान राशि को भी बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा राजीव आवास योजना व मुख्यमंत्री आवास योजना के अलावा अन्य आवास कल्याण योजना में मिलने वाली उपदान राशि में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। बजट भाषण में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने राजीव आवास योजना तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1,30,000 तक आवास उपदान की राशि बढ़ा दी है। अन्य आवास कल्याण योजनाओं के अन्तर्गत मिलने वाली उपदान राशि को 75,000 से बढ़ाकर 1,30,000 किया जाता है। वर्ष 2017-18 में आवासों के निर्माण के लिए 115 करोड़ का बजट परिव्यय प्रस्तावित किया गया है। वहीं, मातृ शक्ति बीमा योजना के अन्तर्गत 10 से 75 वर्ष की लड़कियों, महिलाओं की अपंगता एवं मृत्यु होने पर 1 लाख की बीमा राशि प्रदान की जाती है। मातृशक्ति बीमा योजना के अन्तर्गत इस आर्थिक राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख करने की घोषणा की गई है। यह लड़की, महिलाओं के मृत्यु के संदर्भ में अथवा उन के पतियों के मृत्यु, पूर्ण अपंग होने की स्थिति में दिया जाएगा। अंगविहीन होने पर 1 लाख की राशि प्रदान की जाएगी। सीएम ने स्वतन्त्रता सेनानियों की सम्मान राशि को 10,000 से बढ़ाकर 15,000 करने की घोषणा की। इसके साथ-साथ स्वतन्त्रता सेनानियों की विधवाओं को मिलने वाली सम्मान राशि 5000 से बढ़ाकर 15,000 करने का ऐलान किया। स्वतन्त्रता सेनानियों की पुत्रियों के विवाह के समय दी जाने वाली विवाह अनुदान को 21,000 से बढ़ाकर 31,000 रुपए करने की भी घोषणा की। पुलिस कर्मियों के आवास के लिए 30 करोड़ और रख-रखाव के लिए 6 करोड़ का बजट परिव्यय प्रस्तावित है।
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Sunday, March 5, 2017

Poem for soldiers

वीरों की शान निराली होती है। salute soldiers: http://youtu.be/_93oSpatDUg

Saturday, March 4, 2017

poem for our soldiers salute to our real hero

वीरों की शान निराली होती है

मेरे वतन की मिटटी में लहू की महक कैसे होती है, क्यों मिलती नही किसी को जमीं ए वतन और परिंदों की मलकियत सारे आस्मां पे होती है, कौन है जो लौट के घर नहीं आया, क्यों दरवाजे पे आज भी दीदार ए नज़र होती है

ए खुदा बता मुझे वतन पर कुर्बान होने वालों की जिद क्या होती है, क्यों फितरत इनकी हर वक्त मतवाली होती है , हैरान होगा ए खुदा तू भी जान कर , मेरे देश के इन सपूतों की तो शान निराली होती है, मेरे देश के इन सपूतों की तो शान निराली होती है,।

लिपट कर तिरंगे में बड़ी शान से आते है, हर वक्त हथेली पे इनके जान होती है, होते होंगे वतन को बेचने वाले चन्द "जयचन्द", मेरे सैनिक से तो देश की ऊँची शान होती है, देश के सपूतों की तो सरहद पर ईद और दिवाली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है।

कह दो हवाओं से कि पैगाम उन तक पँहुचा देना , देश के गद्दारो को जरा समझा देना हर बार नहीं क्षमा यंहा स्वीकार होती है,
कोशिश चाहे लाख कर ले हिंदुस्तान की हस्ती न कभी खाक होती है, बन हिमालय खड़ा सिपाही इसी से तो  तिरंगे की पहचान  होती है, मेरे देश के सैनिक की तो सरहद पर ईद और दिवाली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है, मेरे देश के वीरों की शान निराली होती है।

खड़े सरहद पर हर दम, हर वक्त मौत सर पर सवार रहती है , मोत से ही दिल्लगी वतन से ही मोहब्बत होती है ,ऐसे वीरो से तो वतन की आबरु वतन की आन होती है, ऐसी अज़ब दास्ताँ  अज़ब ये कहानी होती है, देश के वीरों की शान निराली होती है देश के वीरों की शान निराली होती है।

आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा

Wednesday, February 22, 2017

क्या आप जानते है महाशिवरात्रि का ये महत्व भी?

जानें क्या है महाशिवरात्रि का रहस्य
‘शिव की महान रात्रि :- महाशिवरात्रि का त्यौहार भारत के आध्यात्मिक उत्सवों की सूची में सबसे महत्वपूर्ण है। भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति में शिव को सबसे बड़ा स्थान दिया गया है। इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कई पहलु सामने आते हैं इसलिए शिवरात्रि का त्यौहार भारत में बहुत प्रसिद्ध है शिव के बारे में अनन्य कथाएं सुनने को मिलती है सबकी अपनी महिमा है।  मैं यंहा आपको आस्था के पक्ष में नहीं ले जाना चाहता उसमें हर किसी का अपना तर्क वितर्क हो सकता है। मैं इस लेख के माध्यम से शिव के सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पक्ष को आप लोगों के सामने रखने का प्रयास करूंगा। शिव को किसी रूप में बांधा नही जा सकता क्योंकि वो निराकार हैं इसलिए शिव के रूप से ज्यादा उनके गुणों से साक्षात्कार करना परम आवश्यक है। सर्वप्रथम "महाशिवरात्रि" के अर्थ को समझने का प्रयत्न करते हैं।
महाशिवरात्रि:-
हर चंद्र माह के चौदहवें दिन या अमावस्या से एक दिन पहले शिवरात्रि होती है। एक कैलेंडर वर्ष में आने वाली बारह शिवरात्रियों में से फरवरी-मार्च में आने वाली महाशिवरात्रि आध्यात्मिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है। इस रात धरती के उत्तरी गोलार्ध की स्थिति ऐसी होती है कि इंसान के शरीर में ऊर्जा कुदरती रूप से ऊपर की ओर बढ़ती है। इस दिन प्रकृति इंसान को अपने आध्यात्मिक चरम पर पहुंचने के लिए प्रेरित करती है। इसका लाभ उठाने के लिए इस परंपरा में हमने एक खास त्यौहार बनाया जो रात भर चलता है। ऊर्जा के इस प्राकृतिक चढ़ाव में मदद करने के लिए रात भर चलने वाले इस त्यौहार का एक मूलभूत तत्व यह पक्का करना है कि आप रीढ़ को सीधा रखते हुए रात भर जागें। इसलिए योगी रात रात भर जागरण करते हैं और इस ऊर्जा को अपने अंदर निहित करते हैं। योगियों से लेकर गृहस्थ जीवन तक शिवरात्रि को महत्वपूर्ण मानते हैं। शिव को आदि गुरु योगीनाथ के रूप में भी जाना जाता है ऐसा माना जाता है कि आज जिस योगिक क्रिया को जाना जाता है उसकी शुरुवात भगवान शिव से ही हुई थी। इसलिए शिवरात्रि को योगियों में इसलिये भी प्रसिद्ध माना जाता है रात भर जाग कर शिव का गुणगान करते हुए कई योगिक क्रियाएं होती है।
संस्कृति में स्थान:-

हिमाचल में शिव का गुणगान करने का भी अपना एक अलग ही तरीका है हिमाचल के लोगों का प्राचीन धर्म शैव था जो की भगवान् शिव के नाम पर था। यंहा के गद्दी समुदाय में शिव भक्ति को बहुत उच्च स्थान दिया गया है यंहा पर शिव के लिए रात भर जागरण चलता है जिसे "नूआला" कहा जाता है। ये शिव की भक्ति का सबसे अनोखा और अद्वितीय ढंग है ऐसी भक्ति की कला हिमाचल के अलावा अन्य कंही देखने को नहीं मिलती। शिवरात्रि के दिन भी हिमाचल के विभिन्न हिस्सों में " नुआले " गाए जाते हैं। नुआले करने के पीछे आध्यत्मिक और सांस्कृतिक दोनों ही पक्ष सामने आते हैं। नुआले में सांस्कृतिक पक्ष ये है कि इससे लोक गाथाओं और कलाओं को बढ़ावा मिलता है। नुआले में 4 से 5 लोगो का समूह होता है जो अपने पारम्परिक वाद्य यंत्रों से तथा शिव की महिमा को गाकर लोगो को धर्म और संस्कृति का ज्ञान देते हैं।  हिमाचल में शिवरात्रि के दिन विवाह करना बहुत शुभ माना जाता है यंहा गद्दी समुदाय के लोगो के विवाह में शिव आराधना की जाती है तथा शिव के वेश भूषा धारण करके ही विवाह की रस्मे अदा की जाती हैं।

अध्यात्म और योग का परिचायक:-
आध्यात्मिक और गृहस्थ जीवन वालो के लिए शिवरात्रि को शिव के विवाह की रात मानते हुए अपनी महत्वकांक्षाओ की पूर्ति हेतु ब्रत धारण करके शिव की आराधना करते हैं। योगी इसे शिव के स्थिर रूप की उतपति मानते हुए कैलाश के समान स्थिर अचल होकर संसार के प्रथम गुरु आदिगुरु की भक्ति करते हैं। हर वर्ग के बीच शिवरात्रि के अपने अपने पक्ष सामने आते हैं। विज्ञानं में किसी उतपति को स्वीकार नहीं किया जाता इसलिए वैज्ञानिक पक्ष की भी पूर्ति करता है शिवरात्रि का त्यौहार। शिव तो अस्तित्वहीन है ये तो साक्षात् एक शून्य है जो न तो शुरू होता है न ही समाप्त।
शिव के रूपों से प्रेरणा:-

* शिव के स्वभाव से हमें जीवन यापन की प्रेरणा मिलती है। यदि शिवरात्रि के अर्थ को सही ढंग से समझना है तो हमे शिव के रूप को उनके स्वभाव को समझना होगा शिव के हर रूप से जो प्रेरणा मिलती है उसे अपने जीवन में उतारना होगा। शिव के शाब्दिक अर्थ के अनुसार कि " जो नहीं है" अर्थात जो संसार में आपका है ही नहीं जिसका कोई आकार नहीं अर्थात सब कुछ शून्य है। विज्ञानं के अनुसार शून्य से पैदा हुआ और शून्य में निहित होना। शिव का ये निराकारी रूप समस्त प्राणियों को प्रेरणा देता है कि भोग विलासिता से दूर रहो सादा जीवन व्यतीत करो। फ़क़ीर की तरह जियो ताकि संसार की भौतिक वस्तुएं कभी आपको दुःख न पँहुचा सकें।
* शिव आदि कैलाश पति के रूप में सन्देश देते है विकट परिस्थिति में भी पहाड़ की तरह खड़े रहो। मुश्किल परिथिति में भी जीवन यापन किया जा सकता है। इसलिए शिव को ही लोक गाथाओं में इस अलौकिक संसार का गुरु बताया गया है।


*शिव का नीलकंठ रूप सन्देश देता है अच्छाई की बृद्धि के लिए यदि बुराई को धारण करना पड़े सहर्ष धारण करने के लिए तैयार रहें,  बलिदान देने के लिए प्रेरित करता है शिव का नीलकंठ रूप जब समुद्र मंथन में विष प्राप्त हुआ तो शिव ने संसार की रक्षा हेतु उसे अपने कंठ में धारण कर लिया शिव का ये रूप हमे संसार के लिए कुछ करने की प्रेरणा देता है। शिव को सभी जीव जंतुओं का भी देवता माना जाता है ऐसी धारणा है कि संसार के समस्त जीव शिव की झोली में रहते हैं।
*भूतनाथ:-
शिव सांपो को गले में धारण करते है। भूतप्रेत यानि बुरी ताकतों की भी वश में रखते हैं। शिव का ये रूप सन्देश देता है कि सभी प्राणियों से प्रेम करो किसी के साथ घृणा मत करो। सभी मिलजुल कर जीवन यापन कर सकते हैं।
*शिव को भोला भंडारी भी कहा जाता जाता है और रूद्र भी,  शिव का ये रूप सन्देश देता है कि हमे स्वभाव में हमेशा भोले और दयालु रहना चाहिए ताकि सबके हृदय में वास कर सकें और रूद्र रूप से सन्देश मिलता है कि जब जब धर्म की हानि हो पाप बढ़े तब अपने कर्तव्यों से विमुख हुए बिना अन्याय के सामने रौद्र रूप में खड़े होने के लिए तत्पर रहो।  शिव के अनेकों रूप और अनेको नाम है हर नाम में कोई न कोई शिक्षा छिपी है।
इस शिवरात्रि हम सब ये प्रण ले कि शिवरात्रि को मात्र एक त्यौहार या ब्रत के नजरिये से न देखे बल्कि आज समाज में मूल्यों के ह्रास के कारण जो समाज के पतन हो रहा है उसमें शिव के दर्शन को और शिक्षाओं को अपनाएं ताकि समाज की दिशा और दशा दोनों में परिवर्तन हो।
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र

Saturday, February 18, 2017

patriotic Poems by Ashish Behal

देशभक्ति की कविताएं

शहीदों को सलाम
आतंक का देखो कैसा ये कोहराम मचा है,कभी पठानकोट तो कभी उड़ी की साजिश को रचा है।
कई शहिदों ने शहादत का जाम पिया
शहीद जगदीश ने भी ऊँचा भारत का नाम किया,
शहीद हुए देश की खातिर,सीने पर गोली खाई थी,
आओ झुक कर करें सलाम इन्हें क्योंकि भारत माँ की लाज बचाई थी ।
लुट गयी माँ औ की कोख,कंही सिन्दूर ही उजड़ गया
गिली थी हाथो की मेंहदी अभी, कंही बजी अभी शहनाई थी, शहीदों ने भारत माँ की लाज बचाई थी ।
भय नहीं हमे पाक के नापाक इरादों का,
डर है तो घर में बैठे जयचन्दों की बेवफाई का।
बहुत हुआ अब आतंक का तांडव,कुछ नया इतिहास रचना होगा,
जाग देश के नोजवान अब लाहोर में तिरंगा फहराना होगा।
कर सर्जिकल स्ट्राइक चूहों को घर में ही दफनाना होगा,
चीर के सीना सिंधु का इस्लामाबाद को हिंदुस्तान बनाना होगा,
शहीदों की शहादत को तब सलाम हमारा होगा,
कराची में बैठा जब हिंदुस्तान का नवाब होगा,
एक और जमीं होगी एक और आसमान होगा बीच में महकता मेरा ये हिंदुस्तान होगा।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा हि प्र
फोन 9736296410

सैनिक की पुकार

सुनो सैनिक की वीरता सुनाने आया हूँ, दर्द की मैं इक गाथा कहने आया हूँ। लहू से लथपथ एक सैनिक जब भारत माता को पुकारे वो करुणा बतलाने आया हूँ वीर सैनिक कहता है......
माँ, माँ दर्द से बेहाल मैं बेजान सा हुआ जाता हूँ भर ले अपने आँचल में, मैं लड़खड़ा सा जाता हूँ। चीर कर देह मेरी, दुश्मन ने हैवानियत का वो खेल खेला है क्या बताऊँ माँ,
बन हिमालय सरहद पर हर घाव मैंने झेला है, हिमाकत दुश्मन की जो मुझे ललकारा है, मैंने घर में घुस कर उसको मारा है। हे माँ मैंने दिन रात अपने लहू से तुझे संवारा है,
थका नहीं,हारा नहीं हर पल गुणगान माँ भारती का गाया है, कमाए होंगे किसी ने नोट ,वोट। मैंने तो भारत माँ के आगे ही शीश झुकाया है,
ले ले छांव में अपनी, अपने आँचल में मुझको छिपा लेना, टूटती इस देह को अपनी ममता से भर देना, बन सैनिक हर बार मैं कुर्बान माँ तुझ पर हो जाऊं, बस रोते बिलखते माँ- बाप को तू संभाल लेना।
खड़ी जो हो मेरे इंतजार में प्राण प्यारी चुपके से उसके कान में नाम मेरा ले आना। ढूंढती बहन की आँखों में मेरी तस्वीर छोड़ आना। फौलाद से मेरे भाई के कंधों को तुम साहला आना। पूछे जो कोई पता मेरा प्यारा सा तिरंगा लहरा आना।
बस फरियाद सैनिक की हर भारतवासी सुन लेना
माँ के दामन को दागदार न होने देना,
कहता है 'आशीष' वास्ता सैनिक का खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना, खुदगर्ज दुनिया में कभी भारत माँ को न बेच देना।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा
Jbt अध्यापक
Ph 9736296410

ना'पाक'  पाकिस्तान
पाक की नापाक हरकतें आखिर कब तक संहेंगे, देश दहक रहा है इंतकाम की आग में कब ये समझेंगे।
बहुत हुआ, सरहद पर अब इक दांव हमारा हो, संभल जा ऐ देश के दुश्मन ऐसा न हो कि लाहौर में लहराता तिरंगा प्यारा हो।

क्या मिलेगा तुझे कश्मीर कश्मीर करते जरा पलट कर देख इतिहास ऐसा न हो कि अबकी बार इस्लामावाद भी हमारा हो।
हे पाकिस्तान, सम्भल जा अभी वक्त हम देते हैं वरना याद रख हिसाब हम सूत समेत लेते हैं।
कर ले ऐ दुश्मन सितम्भ तू, तेरी इंतिहा हम देखेंगे, मर मिटेंगे जो जवान देश पर ऐसे शेर भारत में ही मिलेंगे।
वतन की आवरू को हम यूँ मिटटी में न मिलने देंगे,शहीदों के कतरे कतरे का हिसाब हम लेंगे।
इक दिन फैसला उनके और हमारे दरम्याँ होगा न कोई आतंकी न कोई पाकिस्तान होगा, तभी तो बुलन्दी पर अपना हिंदुस्तान होगा, इक और जमीन इक और आसमां होगा बीच में महकता अपना ये हिन्दुस्तां होगा।
आशीष बहल चुवाड़ी

इक दिया शहीदों के नाम जलाते हैं

खुद को वतन पर कुर्बान करते हैं हर दम हँसते और मुस्कुराते वतन के काम आते हैं इसलिए वतन की आवरु,वतन की शान कहलाते हैं ,तिरंगे में लिपटे भी हर दम ख़ुशी का गान गाते हैं आओ इस दिवाली इक दिया उन शहीदों के नाम जलाते हैं।

कट जाये जो सर उनके उफ़ न जो मुह से करते हैं, वतन की सरहद पर वो अपना जीवन अर्पण करते हैं, बन हिमालय रक्षा वो हर दम हिंदुस्तान की करते हैं, वतन की खातिर वो जीते और मरते है, हर पल खड़े सरहद पर दुश्मन का नामों निशान मिटाते हैं, आओ इस दिवाली एक दिया उन वीर योद्धाओं के नाम जलाते हैं।

आशीष बहल



Thursday, February 9, 2017

बहुत कुछ सिखाती है ये कहानी।

चुनोतियों को स्वीकार करो, मंजिल कदम चूमेगी।


वर्तमान परिपेक्ष्य में हम प्रतियोगिता की होड़ में इस कदर उलझे है कि हम ज़िन्दगी का असली मकसद ही भूल गए हैं आखिर हम क्या चाहते है हमे क्या करना है कंहा पंहुचना है? हम इन बातों से कोसो दूर हो गए हैं क्योंकि हमने चुनीतियों को स्वीकार करना बंद कर दिया है। जब भी चुनोतियों की बात आती है या कोई समस्या हमारे सामने उतपन होती है उस समय मूल मंत्र यही है कि या तो उन्हें स्वीकार करो या उनसे भागते रहो। जो स्वीकार करता है वो जीवन में अपनी मंजिल को पाता है और जो भागता है उसकी दौड़ मंजिल की उलटी दिशा में होती है इसलिए मंजिल से कोसों दूर हो जाता है।
एक बहुत ही बढ़िया उदाहरण जापान के लोगो का है
जापान में हमेशा से ही मछलियाँ खाने का
एक ज़रुरी हिस्सा रही हैं । और ये जितनी
ताज़ी होतीं हैँ लोग उसे उतना ही पसंद करते
हैं । लेकिन जापान के तटों के आस-पास
इतनी मछलियाँ नहीं होतीं की उनसे लोगोँ
की डिमांड पूरी की जा सके । नतीजतन
मछुआरों को दूर समुंद्र में जाकर मछलियाँ
पकड़नी पड़ती हैं।जब इस तरह से मछलियाँ
पकड़ने की शुरुआत हुई तो मछुआरों के
सामने एक गंभीर समस्या सामने आई ।

वे जितनी दूर मछली पक़डने जाते उन्हें
लौटने मे उतना ही अधिक समय लगता
और मछलियाँ बाजार तक पहुँचते-पहुँचते
बासी हो जातीँ , ओर फिर कोई उन्हें खरीदना
नहीं चाहता ।इस समस्या से निपटने के लिए
मछुआरों ने अपनी बोट्स पर फ्रीज़र लगवा
लिये । वे मछलियाँ पकड़ते और उन्हें फ्रीजर
में डाल देते ।

इस तरह से वे और भी देर तक मछलियाँ
पकड़ सकते थे और उसे बाजार तक पहुंचा
सकते थे । पर इसमें भी एक समस्या आ
गयी । जापानी फ्रोजेन फ़िश ओर फ्रेश
फिश में आसनी से अंतर कर लेते और
फ्रोजेन मछलियों को खरीदने से कतराते ,
उन्हें तो किसी भी कीमत पर ताज़ी मछलियाँ
ही चाहिए होतीं ।एक बार फिर मछुआरों ने
इस समस्या से निपटने की सोची और
इस बार एक शानदार तरीका निकाला ,
.उन्होंने अपनी बड़ी – बड़ी जहाजों पर
फ़िश टैंक्स बनवा लिए ओर अब वे
मछलियाँ पकड़ते और उन्हें पानी से
भरे टैंकों मे डाल देते ।

टैंक में डालने के बाद कुछ देर तो
मछलियाँ इधर उधर भागती पर जगह
कम होने के कारण वे जल्द ही एक
जगह स्थिर हो जातीं ,और जब ये मछलियाँ
बाजार पहुँचती तो भले वे ही सांस ले रही
होतीं लकिन उनमेँ वो बात नहीं होती जो
आज़ाद घूम रही ताज़ी मछलियों मे होती ,
ओर जापानी चखकर इन मछलियों में भी
अंतर कर लेते ।

तो इतना कुछ करने के बाद भी समस्या
जस की तस बनी हुई थी।अब मछुवारे
क्या करते ? वे कौन सा उपाय लगाते कि
ताज़ी मछलियाँ लोगोँ तक पहुँच पाती ?नहीं,
उन्होंने कुछ नया नहीं किया , वें अभी भी
मछलियाँ टैंक्स में ही रखते , पर इस बार
वो हर एक टैंक मे एक छोटी सी शार्क
मछली भी ङाल देते।

शार्क कुछ मछलियों को जरूर खा जाती
पर ज्यादातर मछलियाँ बिलकुल ताज़ी
पहुंचती।ऐसा क्यों होता ? क्योंकि शार्क
बाकी मछलियों की लिए एक चैलेंज की
तरह थी। उसकी मौज़ूदगी बाक़ी मछलियों
को हमेशा चौकन्ना रखती ओर अपनी
जान बचाने के लिए वे हमेशा अलर्ट रहती।

इसीलिए कई दिनों तक टैंक में रह्ने के
बावज़ूद उनमे स्फूर्ति ओर ताजापन बना रहता।

आज बहुत से लोगों की ज़िन्दगी टैंक मे पड़ी उन मछलियो की तरह हो गयी है जिन्हे जगाने की लिए
कोई शार्क मौज़ूद नहीं है। और अगर
दुर्भाग्यवश आपके साथ भी ऐसा ही है
तो आपको भी आपनी ज़िन्दगी में नई चुनोतियों को स्वीकार करने होगा।
आप जिस रूटीन के आदि हों चुकें हैँ
ऊससे कुछ अलग़ करना होगा, आपको
अपना दायरा बढ़ाना होगा और एक
बार फिर ज़िन्दगी में रोमांच और नयापन
लाना होगा।
नहीं तो , बासी मछलियों की तरह आपका
भी मोल कम हों जायेगा और लोग आपसे
मिलने-जुलने की बजाय बचते नजर आएंगे।

और दूसरी तरफ अगर आपकी लाइफ
में चैलेंजेज हैँ , बाधाएं हैँ तो उन्हें कोसते
मत रहिये , कहीं ना कहीं ये आपको तरो ताज़ा बनाये रखती हैँ , इन्हेँ
स्वीकार करिये, इनका सामना करिये
और अपना  तेज बनाये रखिये।👍
आशीष बहल
चुवाड़ी जिला चम्बा।